फ़िलहाल में, दर्द के बारे में एक बार जानी है
दर्द जब होता है तब ही तकलीफ़ होती है
चिल्कन, तड़पना, जलन, घबराहट, साँसों का चढ़ना
चमड़ी और उसके अंदर गर्म हो जाना और फिर ठंडा होना धीरे धीरे
अचानक से दर्द उठता है
मतलब कहीं रहता है भीतर ही
एक बात का और पता चला
जब सुई चुभती है तो जलन और दर्द में फ़र्क़ कर पाना मुश्किल होता है
ये दर्द दिल टूटने वाले दर्द से अलग है
क्युकी या दर्द की कहानी अलग है
सरकार से धोखे का दर्द गुस्सा वाला होता है
माहवारी का दर्द तड़प होती है
कुछ छूट जाने की… नसें चरमरा जाती है
खून खींच ले जाता है सब
कमर की लचक
चाल की मदहोशी
मन की कमज़ोरी
अपनो की मौत का दर्द बिछोह और ना मिल पाने का
अधूरी बातों और यादों का होता है
दर्द की कहानी में दुख है
इसलिए मन के दर्द को ज़्यादा तवज्जो दी
कवियों और लेखकों ने
ज़हनी दर्द रूहानी दर्द से अलग है
तकलीफ़ अलग कैसे है
साथ का ना होना हर दर्द में तकलीफ़ देता है
मन का एक दर्द ये है कि
किस दर्द मएमएलए कितना इज़हार करना है
किस दर्द में कितना दहाड़ना है
दर्द कौन सा वाला है
दर्द फायदा देगा या नुकसान
ये समझ पाना आसान नहीं।
यही हम अलग हो जाते हैं।
हमारी जात भी
औरतें दर्द में रोती है
मर्द को दर्द नहीं होता ।
इस ज़ुल्म में ख़ाब बदनाम होता है
दर्द की जात जानने में
मैं मर्द हो रही हूँ
जिसे दर्द कम होता है
और वो रोती नहीं है ।
दर्द की जात समझ रही हूँ
और अपनी भी।
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