दुनिया में तमाम उलझने
बगावत सितम के किस्से और ज़ुल्म हैं
मेरे अपने इश्क़ और इंतज़ार की नज़्मों ने जगह रोक रखी है
हैरान हूँ अपनी दीद पर
जो मोहब्बत को मसला
और तमाम मसलों की ताबीर मानती है।
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मैं एक सरकारी नौकरी में हूँ, सैलरी आती है महीने की शुरुआत में। शादीशुदा हूँ और एक ईश्वर और समाज से डरने वाले और सामाजिक दायरों में रहने वाल...
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