दुनिया में तमाम उलझने
बगावत सितम के किस्से और ज़ुल्म हैं
मेरे अपने इश्क़ और इंतज़ार की नज़्मों ने जगह रोक रखी है
हैरान हूँ अपनी दीद पर
जो मोहब्बत को मसला
और तमाम मसलों की ताबीर मानती है।
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फ़िलहाल में, दर्द के बारे में एक बार जानी है दर्द जब होता है तब ही तकलीफ़ होती है चिल्कन, तड़पना, जलन, घबराहट, साँसों का चढ़ना चमड़ी और उ...
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