Thursday, 9 May 2019

रैंडम थॉट

[5/9, 5:54 PM] garima: 

न कही जाने की जुगत है
न ही तलब
पर यहां रुकना भी नही
और जाना भी है
कैसे और कब जाउंगी
और कहां?


[5/9, 5:58 PM] garima:

ठहराव अच्छा मानते है
चरित्र की विशेषता मानते है
न समझ पाती हूँ
न देख पाती हूं
डर हो के भी डर नही है
एहसास बहुत
उनके निशान बहुत
तेज़ सांसो की रफ्तार बहुत
पर मेरी नज़र कही और है
सब नकार
सब संभाल
कुछ भूली
कुछ पगली
उससे
किससे?
मिलना चाहती है
अस्थिरता
ये बेचैनी
चरित्र की
निशानी है क्या?

  मेरे पास हर टुकड़े पर उसे पूरा करने की खता करने वाला एक शख़्स मौजूद था    मौशिक़ी हो या हिमाक़त  शिक़वा हो गया माज़रत  हसना हो सखियों संग ...